जिला बालोतरा की पुलिस ने “ऑपरेशन मदमर्दन” के अंतर्गत एक चौंकाने वाली कार्रवाई करते हुए शराब तस्करों के एक शातिर नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। तस्करों ने इस बार कानून की आँखों में धूल झोंकने के लिए एम्बुलेंस का सहारा लिया था, लेकिन पुलिस की सतर्कता ने उनके इस मंसूबे को नाकाम कर दिया।

शराब की खेप के साथ पकड़ी गई ‘फर्जी एम्बुलेंस’
पुलिस अधीक्षक हरी शंकर ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस टीम ने पुख्ता सूचना के आधार पर 3 अप्रैल की रात बालोतरा-पचपदरा रोड पर नाकाबंदी की थी। इसी दौरान एक ईको मॉडल की प्राइवेट एम्बुलेंस, जो देखने में पूरी तरह वास्तविक लग रही थी, को पुलिस ने संदिग्ध मानकर रुकवाना चाहा। लेकिन पुलिस को देखकर वाहन को एक तरफ खड़ा कर तीन तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।
जब पुलिस ने एम्बुलेंस की तलाशी ली, तो उसमें से 16 कार्टून अवैध अंग्रेजी शराब और बीयर बरामद हुए। इसके साथ ही वाहन को जब्त कर लिया गया।
तस्करी का चौंकाने वाला तरीका: एम्बुलेंस में ‘फर्जी मरीज’
यह मामला तब और हैरान करने वाला बन गया जब जांच में सामने आया कि तस्कर इस एम्बुलेंस को पूरी तरह एक असली अस्पताल वाहन की तरह तैयार करवाकर तस्करी करते थे।
- गाड़ी पर गुजराती भाषा में प्राइवेट ‘आस्था अस्पताल’ का लोगो चिपकाया गया था।
- एम्बुलेंस के अंदर एक व्यक्ति को पीछे लेटाकर ‘मरीज’ का रूप दिया जाता था, जिसे चादर ओढ़ा दी जाती थी ताकि वह वास्तविक मरीज लगे।
- सामने बैठे दो अन्य व्यक्ति “अटेंडेंट” की भूमिका में रहते थे।
- तस्करों ने वाहन में सायरन और लाल-बत्ती तक लगवा रखी थी ताकि पुलिस को भ्रमित किया जा सके।
- किसी को शक न हो, इसके लिए हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया गया था।

यह चतुराई भरा तरीका कई बार पुलिस चेकिंग से बच निकलने में सफल हुआ, क्योंकि आमतौर पर मरीज की हालत को देखते हुए एम्बुलेंस को बारीकी से नहीं रोका जाता।
पुलिस की सजगता से टूटा तस्करी का जाल
डीसीआरबी बालोतरा से मिली सूचना और स्थानीय पुलिस की तत्परता से यह पूरा जाल सामने आया। यह कार्रवाई दर्शाती है कि चाहे तस्कर कितनी भी चालाकी से अपने रास्ते बनाएं, पुलिस की सक्रियता और सतर्कता के आगे उनके मंसूबे नाकाम ही होते हैं।
पुलिस ने इस मामले में धारा 19/84, 54ए राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1960 के तहत मामला दर्ज किया है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है, जिनकी पहचान जल्द ही कर ली जाएगी।
निष्कर्ष: कानून से नहीं बच सकते अपराधी
यह मामला एक बार फिर सिद्ध करता है कि अपराधी हर बार नए-नए तरीकों से कानून को धोखा देने की कोशिश करते हैं, लेकिन पुलिस की सूझबूझ, जमीनी स्तर पर मेहनत और सूचना तंत्र की सक्रियता से ऐसे मंसूबे ज्यादा देर तक टिक नहीं पाते।
“ऑपरेशन मदमर्दन” के तहत की गई इस कार्रवाई को जिला स्तर पर एक बड़ी सफलता माना जा रहा है और इससे यह संकेत भी मिलते हैं कि अब पुलिस हर स्तर पर और भी अधिक सतर्क और तकनीकी रूप से सशक्त हो रही है।
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