बालोतरा।
पचपदरा रोड स्थित सिटीलाइट अस्पताल में उपचार के दौरान युवक की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद आखिरकार दो दिन चले धरने और लंबी वार्ताओं के बाद समाप्त हुआ। मृतक की पहचान मालाराम गोदारा निवासी अकदड़ा के रूप में हुई थी।
✦ घटना की शुरुआत

परिजनों का आरोप था कि साधारण हाथ के फैक्चर का इलाज करवाने आए मालाराम को रात में इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। इससे गुस्साए परिजनों और समाजजनों ने शव को अस्पताल परिसर में बर्फ की शिलाओं पर रखकर धरना शुरू कर दिया।
✦ सांसद उम्मेदराम बेनीवाल की मौजूदगी
देर शाम सांसद उम्मेदराम बेनीवाल भी धरना स्थल पर पहुँचे और परिजनों से वार्ता की। बेनीवाल ने रात का वक्त धरना स्थल पर गुजारा। बावजूद इसके, दूसरे दिन सुबह तक धरना जारी रहा और बड़ी संख्या में लोग अस्पताल के बाहर सड़क पर जुट गए।

✦ IMA बालोतरा का विरोध
इस पूरे मामले पर IMA बालोतरा अस्पताल प्रशासन के पक्ष में उतर आया।
IMA अध्यक्ष डॉ. संतोष सिंह शिवनानी ने बयान जारी करते हुए कहा कि शव के साथ अस्पताल में प्रदर्शन करना चिकित्सक समुदाय के लिए आहत करने वाला है।
- IMA ने 29 अगस्त, शुक्रवार को बालोतरा के सभी निजी अस्पतालों की ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं बंद रखने का आह्वान किया।
- साथ ही सरकारी डॉक्टरों से भी निजी आवास पर ओपीडी न करने की अपील की गई।
हालाँकि, इस हड़ताल का मिला-जुला असर दिखा।
- कई निजी अस्पतालों में बाहर से ताले लगे मिले, लेकिन अंदर डॉक्टर दूसरे दरवाजे से मरीजों को देख रहे थे और उपचार कर रहे थे।
- वहीं सरकारी अस्पताल में डॉक्टर अपनी ड्यूटी पर मौजूद रहे।
✦ अंतिम वार्ता और समझौता
शाम होते-होते मृतक के परिजनों, समाज प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच अंतिम दौर की वार्ता हुई।
अस्पताल प्रबंधन ने साफ कर दिया कि वह आर्थिक मुआवजा नहीं देगा और सूत्रो की हवाले से बात सामने आए की अस्पताल संचालक ने कहा कि – “अस्पताल के खिलाफ जो कार्रवाई करनी हो, आप कर सकते हैं!”
इसके बाद बालोतरा जिला कलेक्टर के साथ प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई, जिसमें निम्न सहमतियां बनीं –
- मृतक का पोस्टमार्टम जोधपुर एम्स के मेडिकल बोर्ड से कराया जाएगा।
- यदि मेडिकल रिपोर्ट में लापरवाही साबित होती है, तो सिटीलाइट अस्पताल के डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई होगी।
- जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल को सीज किया जाएगा।
- आरोप सही पाए जाने पर मृतक के परिवार को सरकार नियमानुसार आर्थिक सहायता प्रदान करेगी।
- सांसद उम्मेदराम बेनीवाल ने मृतक परिवार को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।

इसके बाद परिजनों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की और शव को पोस्टमार्टम के लिए जोधपुर ले जाया गया।
✦ माहौल और असर
लगातार दो दिन तक चले इस धरने ने शहर में तनावपूर्ण माहौल बना दिया था।
- अस्पताल परिसर के बाहर पुलिस बल तैनात रहा।
- निजी अस्पतालों की हड़ताल से मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

अंततः प्रशासन और समाज के बीच बनी सहमति के बाद मामले का समाधान निकला और मृतक परिवार ने शव का अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया।