जोधपुर/बालोतरा/पाली | विशेष रिपोर्ट
राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली जोजरी-बांडी-लूणी नदी प्रणाली में वर्षों से हो रहे प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा हस्तक्षेप किया है। न्यायालय ने माना कि यह केवल पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि 20 लाख से अधिक लोगों के जीवन, कृषि, पशुधन, भूजल और पूरे पारिस्थितिक तंत्र पर मंडराता गंभीर खतरा है।
29 मई 2026 को दिए गए ऐतिहासिक आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने एक छिपे हुए अवैध पाइपलाइन नेटवर्क का खुलासा होने के बाद राजस्थान सरकार को तीन दिन के भीतर विशेष जांच दल (SIT) गठित करने, संबंधित CETP से जुड़े उद्योगों को बंद रखने तथा पूरे मामले की आपराधिक जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 में स्वतः संज्ञान लेते हुए “2 Million Lives at Risk, Contamination in Jojari River, Rajasthan” शीर्षक से जनहित मामला दर्ज किया था। कोर्ट के समक्ष रखी गई रिपोर्टों में सामने आया था कि जोजरी, बांडी और लूणी नदी तंत्र में औद्योगिक प्रदूषण, बिना उपचारित सीवेज और प्रशासनिक लापरवाही के कारण पर्यावरणीय विनाश की स्थिति बन चुकी है।
मामले की निगरानी के लिए राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता में हाई लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी गठित की गई थी।
कैसे सामने आया अवैध पाइपलाइन नेटवर्क?
27 और 28 मई को कमेटी ने सांगरिया RIICO क्षेत्र स्थित CETP के आसपास निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को भूमिगत जल प्रवाह की आवाजें सुनाई दीं, जबकि वहां किसी प्रकार का वैध डिस्चार्ज सिस्टम दिखाई नहीं दे रहा था। इससे संदेह पैदा हुआ।
जब अधिकारियों से पूछताछ की गई तो किसी ने इसे बंद हो चुकी पुरानी पाइपलाइन बताया, किसी ने PHED की लाइन बताया और किसी ने इसे परित्यक्त परियोजना बताया। लेकिन गहन जांच और खुदाई के बाद एक सक्रिय भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क का खुलासा हुआ।
कमेटी द्वारा लिए गए नमूनों में पानी का pH स्तर लगभग 10 पाया गया, जो अत्यधिक क्षारीय और प्रदूषणयुक्त जल का संकेत है।
सीधे नदी में छोड़ा जा रहा था जहरीला अपशिष्ट
खुदाई में सामने आया कि यह नेटवर्क एक अवैध बाईपास सिस्टम था, जिसके जरिए बिना उपचारित या अपर्याप्त रूप से उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट RIICO ड्रेन के माध्यम से सीधे जोजरी नदी में पहुंचाया जा रहा था।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इतने लंबे समय तक यह नेटवर्क CETP के पास संचालित होता रहा और किसी अधिकारी को इसकी जानकारी नहीं थी, यह विश्वास करना कठिन है।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला सामान्य प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर नियामकीय विफलता का उदाहरण है।
कोर्ट ने कहा कि यदि अधिकारी इस अवैध नेटवर्क से अनजान थे तो यह चौंकाने वाली अक्षमता है, और यदि जानते थे तो यह सार्वजनिक विश्वास का घोर दुरुपयोग है।
न्यायालय ने यह भी कहा कि पर्यावरणीय शासन केवल कागजी कार्रवाई से नहीं चल सकता और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसी संस्थाओं का दायित्व पर्यावरण और जनता के स्वास्थ्य की रक्षा करना है।
300 उद्योगों पर तत्काल प्रभाव से ताला
राजस्थान सरकार ने कोर्ट को बताया कि खुलासे के बाद संबंधित CETP और उससे जुड़े लगभग 300 औद्योगिक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि ये उद्योग अब तब तक दोबारा शुरू नहीं हो सकेंगे, जब तक अदालत स्वयं अनुमति नहीं देती।
SIT करेगी व्यापक जांच
सुप्रीम कोर्ट ने तीन दिन के भीतर SIT गठित करने का आदेश दिया है।
SIT जांच करेगी:
- अवैध पाइपलाइन किसने बनाई?
- इसका संचालन कौन कर रहा था?
- कौन-कौन से उद्योग इसमें शामिल थे?
- किन अधिकारियों ने मदद या संरक्षण दिया?
- क्या अदालत और कमेटी को गुमराह किया गया?
SIT में जोधपुर, बालोतरा और पाली के पुलिस अधीक्षक भी शामिल होंगे।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों पर कार्रवाई
मामले में RSPCB ने दो अधिकारियों को निलंबित किया और क्षेत्रीय अधिकारी को APO किया था।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे अपर्याप्त बताते हुए जोधपुर के क्षेत्रीय अधिकारी को तत्काल निलंबित करने और विभागीय कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए।
मानसून से पहले जहरीले स्लज को हटाने का आदेश
कमेटी ने चेतावनी दी है कि नदी और नालों में वर्षों से जमा प्रदूषित स्लज मानसून के दौरान बहकर खेतों, चारागाहों और भूजल स्रोतों तक पहुंच सकता है। इससे बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को युद्धस्तर पर स्लज हटाने और वैज्ञानिक तरीके से उसका निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद RSPCB की नई पहल
सुप्रीम कोर्ट के 18 मार्च 2026 के निर्देशों के अनुपालन में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) ने 1 जून 2026 को एक विशेषज्ञ समिति गठित की है। यह समिति कपड़ा उद्योगों में उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट जल (Wastewater) की सटीक माप के लिए मशीन आधारित और तकनीक आधारित प्रणाली विकसित करेगी, जिससे वर्तमान अनुमान आधारित व्यवस्था को बदला जा सके।
इस समिति में RSPCB अधिकारियों के साथ IIT दिल्ली के प्रोफेसर विवेक कुमार और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. चिराग भीमानी को शामिल किया गया है। समिति एक माह में अपनी रिपोर्ट देगी।
कोर्ट की अंतिम चेतावनी
अपने आदेश के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नदियां केवल जलधाराएं नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व का आधार हैं। नदी का विनाश केवल पर्यावरण का नुकसान नहीं बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था पर भी सीधा हमला है।
न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि जोजरी-बांडी-लूणी नदी तंत्र को बचाने के लिए अब किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी संबंधित एजेंसियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।









